
विकास तेली
Ex पूर्णकालिक प्रचारक (BAMCEF)
मैं BAMCEF के पूर्ण कालीन प्रचारक के रूप में आगरा मण्डल का 1 साल प्रभारी रहा, उससे पहले BMM का फ़िरोज़ाबाद जिला अध्यक्ष था।
आगरा मण्डल में चार जिले आते हैं, आगरा,मथुरा,फिरोजाबाद और मैनपुरी, जिसमें आगरा, मथुरा में ही टीम थी, मैनपुरी में कोई टीम नहीं थी।इनमें से सबसे ज्यादा फंड आगरा-मथुरा से आता था, उसके बाद फिरोजबाद का नम्बर था।
मुझे जब आगरा मण्डल का प्रभारी बनाया गया तो सारे फंड देने वालों का डाटा मेरे पास आया, जब मैं फील्ड में घूमा तो ये समझ में आया कि जितना फंड लोग दे रहे हैं उतना फंड सँगठन में जमा ही नहीं हो रहा है।जब इस मामले की पड़ताल की तो पाया कि आगरा,मथुरा से कई लोगों से फंड उठाया गया ,उनको रसीदें भी दी गयी, लेकिन ऊपर जमा नहीं किया गया। ये बात मैंने बीएल मातंग को बताई ,मातंग ने मुझे विलास खरात के पास भेजा। खरात जल्द ही जांच के नाम पे आगरा आया, और मटन-मुर्गा खा के निकल गया, और बस इतना बोला कि यहाँ बदमाशी हो रही है, मैं साब(वामन मेश्राम) से बात करूंगा।
जब कुछ नहीं हुआ तो मैंने वामन मेश्राम को लैटर लिखा और काम्बले से बात की, जल्द ही बीएम काम्बले भी आगरा आये, तब तक मैं सारे सबूत इकट्ठे कर चुका था,जिससे ये मालूम हुआ कि इस चोरी का सरगना प्रवेंद्र प्रताप है और इसके साथ आगरा के दो पदाधिकारी और मथुरा के दो पदाधिकारी भी शामिल हैं।
मैंने वो सारे सुबूत काम्बले साब को दे दिए, और इंतजार करने लगा कि इस चोरी के सरगना प्रवेंद्र प्रताप और बाकी ठगों के खिलाफ कुछ होगा।लेकिन तब तक इस पूरे प्रकरण की जानकारी प्रवेंद्र प्रताप एंड कम्पनी को हो चुकी थी।उसके एक पंटर निरंजन ने मुझे धमकी दी कि या तो हमारे साथ मिल के रहो नहीं तो जैसे तुमसे पहले वाले प्रचारक को मार के भगाया था वैसे ही तुम्हारे साथ भी होगा। इसके बाद मैं सीधा लखनऊ गया वहां विलास खरात को ये बात बताई, और दूसरे दिन आगरा वापस आया । मैं आगरा आया ही था कि प्रवेंद्र का फोन आया और इसने भी धमकी भरे लहजे में मुझे ज्यादा जासूसी ना करने की और संगठन में इधर की बाते उधर ना करने की सलाह दी।
इसके बाद मैंने खुल के इन चोरों के सामने मोर्चा खोल दिया, और जो लोग ईमानदारी से काम कर रहे थे उनको साथ ले कर वामन मेश्राम को लेटर लिखा, जिसके 1 हफ्ते के बाद मेरा ट्रांसफर आगरा मण्डल से अलीगढ़ मण्डल कर दिया गया, जिसे लेने से मैंने मना कर दिया। उसके बाद अनुशासन हीनता में मुझे संगठन से निष्कासित कर दिया गया।
दूसरी बात मेरे आने पहले आगरा मण्डल में केवल चमार पदाधिकारी थे, मैंने जातियों की विविधता बढाई थी कई जातियों को जोड़ा था, गैरचमार जातियों से तीन पुर्णकालिक प्रचारक भी निकले थे, मेरा विरोध तो इसी के बाद शुरु हो गया था, कारण ये था कि अन्य जातियों के ज्यादा लोग आएंगे तो चोरी नहीं हो पाएगी, ये बात बाद में समझ आयी थी।
सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि ये सब वामन मेश्राम के संरक्षण में होता है, वो फंड के बड़े गेम करता है उसके पंटर फंड के छोटे गेम करते हैं।
